वार्ड क्रमांक 32-33 केंट गुलाबगंज से लेकर खेजरा रोड तक सड़क में गड्ढे ही गड्ढे नागरिकों ने सोंपी सवर्ण आर्मी को समस्याएं
वार्ड क्रमांक 32-33 केंट गुलाबगंज से लेकर खेजरा रोड तक सड़क में गड्ढे ही गड्ढे नागरिकों ने सोंपी सवर्ण आर्मी को समस्याएं
गुना।अभिनय मोरे की खास रिपोर्ट- सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह तोमर ने बताया कि वार्ड क्रमांक 32 और 33 के नागरिक कौन है उन्हें नगर पालिका से संबंधित शिकायतों के संबंध में ज्ञापन सोपा है। जिसमें उन्होंने मांग की है कि गुलाबगंज से लेकर खेजरा तक की रोड सीसी डलाई जाए। या मरम्मत की जावे। साथ ही नालियों की समस्या है। उनकी सफाई नहीं होती है। प्रतिदिन की सफाई कराई जावे। एवं जो स्ट्रीट लाइट के खंबे हैं उन पर लाइट नहीं जलती है। जिसके कारण रात में चोरियों का खतरा बढ़ जाता है। इन सभी मांगों को लेकर नागरिकों ने सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह तोमर को वार्ड 32 और 33 में जनसुनवाई के लिए बुलाया था। जहां सवर्ण आर्मी जिला अध्यक्ष विक्रम तोमर ने नागरिकों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनी। और जिला कलेक्टर नगर पालिका के सीएमओ और स्वच्छ भारत अभियान के कमिश्नर भोपाल को उनकी समस्या प्रेषित की।
नागरिकों की प्रमुख समस्याएं: सवर्ण आर्मी जिला अध्यक्ष विक्रम तोमर ने बताया नागरिकों को होने वाली मुख्य परेशानियाँ:
स्वास्थ्य संबंधी खतरे: नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहने से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड जैसी बीमारियाँ फैलती हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को खतरा होता है।
बदबू और गंदगी: नालियों के जाम होने से पूरे इलाके में बदबू फैलती है। और गंदगी जमा होती है, जिससे रहना मुश्किल हो जाता है।
जलजमाव: बारिश या पानी की निकासी न होने पर सड़कें तालाब बन जाती हैं, जिससे चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है और लोग गिरकर घायल होते हैं।
मच्छरों का प्रकोप: रुके हुए गंदे पानी में मच्छर पनपते हैं, जिससे मच्छरों की संख्या बढ़ती है और बीमारियाँ फैलती हैं।
परिवहन में बाधा: टूटी सड़कें और पानी भरे गड्ढे वाहनों के लिए परेशानी बनते हैं, और दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
अंधेरा और असुरक्षा: लाइट न होने और टूटी सड़कों के कारण रात में अंधेरा रहता है, जिससे असामाजिक गतिविधियों और हादसों का डर बढ़ जाता है।
कारण:
नालियों की नियमित सफाई न होना.
खराब और अधूरी सड़कें.
जल निगम या अन्य विभागों द्वारा पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत न करना.
जनप्रतिनिधियों और नगर निगम की उदासीनता.




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