धर्म रक्षा दिवस के रूप में मना स्वामी श्रद्धानंद बलिदान दिवस
धर्म रक्षा दिवस के रूप में मना स्वामी श्रद्धानंद बलिदान दिवस
आरोन- श्री राम दरबार भारत माता की पूजन के बाद विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड अध्यक्ष राजेश शास्त्री ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जालंधर जिला के तलवान गांव में फरवरी सन् 1856 को एक महान हिन्दू विभूति का अवतार हुआ, जिन का नाम बृहस्पति रखा गया वह युवा अवस्था में आर्य समाज के स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रवचन सुनकर इतने प्रभावित हुए कि संन्यासी जीवन अपना लिया, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया कितने ही वैदिक गुरु कुलों की स्थापना की नारी शिक्षा अछूतोंधार के लिए भी सार्थक कार्य किए तथा शुद्धि आंदोलन चलाकर हजारों हिंदुओं की घर वापसी कराई जिनका कालांतर में जबरन धर्म परिवर्तन करा लिया गया था जब वह हिंदुओं को घर वापसी के आंदोलन तेज गति से चला रहे थे तब उन्हें उस समय के कई राजनीतिक तथा धर्म विरोधी मानसिकता के लोगों द्वारा अड़चनें पैदा की गई जिनसे ना घबराकर उन्होंने अपने आंदोलन को जारी रखा अंततः स्वामी श्रद्धानंद जी की 70 वर्ष की आयु में इस्लामी कट्टरपंथी अब्दुल रशीद ने 1926 में दिल्ली के चांदनी चौक के पास गोली मार कर हत्या कर दी वही बौद्धिक के माध्यम से प्रकाश डालते हुए बजरंग दल जिला सह संयोजक सुनील शर्मा ने हिंदुओं को संगठित करने की आवश्यकता तथा बांग्लादेश की तात्कालिक घटनाओं से शिक्षा लेकर हिंदू धर्म संस्कृति को बचाने की चुनौतियों ओर उनके निधानों पर चिंतन किया कार्यक्रम के अंत में विहिप के प्रखंड मंत्री दीपक ओझा ने कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट किया इस अवसर पर हरवीर रजक ,भानु सोलंकी निक्की प्रजापति के साथ स्थानीय दास हनुमान मंदिर पर बड़ी संख्या में विहिप बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की उपस्थित रही




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