डॉक्टरों की सूझबूझ से बची 19 वर्षीय युवक की जान
डॉक्टरों की सूझबूझ से बची 19 वर्षीय युवक की जान
जिला चिकित्सालय गुना के आईसीयू में दो सप्ताह तक चला जीवन–मरण का संघर्ष, सफल उपचार
गुना। डॉक्टरों की तत्परता, सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता ने एक बार फिर जीवन की जीत सुनिश्चित की है। दिसंबर के प्रथम सप्ताह में देपालखेड़ी, नई सराय (जिला अशोकनगर) निवासी 19 वर्षीय युवक गोलू चिड़ार द्वारा अज्ञात कारणों के चलते फांसी लगाने का प्रयास किया गया, जिससे उसकी हालत अत्यंत गंभीर हो गई।
परिजनों ने तत्काल युवक को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति नाजुक होने पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया। गंभीर अवस्था में युवक को जिला चिकित्सालय गुना के मेडिकल सेकेंड वार्ड आईसीयू में भर्ती कराया गया।
यहां डॉ. सोवरण राय एवं डॉ. राहुल रघुवंशी की कुशल चिकित्सा रणनीति, त्वरित निर्णय क्षमता एवं सतत निगरानी में युवक का उपचार प्रारंभ किया गया। आईसीयू में लगभग दो सप्ताह तक चले गहन इलाज और सतर्क देखरेख के चलते युवक की हालत में लगातार सुधार होता गया।
नर्सिंग इंचार्ज पूजा सिंह, ऑन-ड्यूटी स्टाफ वर्षा माकोडे, अजय अहिरवार, ज्योति राणे, सुनील धाकड़, दीपिका पटेल, विधि चौहान, साधना बरगोदिया सहित पूरी चिकित्सा टीम ने दिन-रात समर्पित भाव से उपचार किया, जिसके परिणामस्वरूप युवक की जान बचाई जा सकी।
फिलहाल युवक पूरी तरह खतरे से बाहर है।
युवक के परिजनों ने जिला चिकित्सालय गुना के डॉक्टरों एवं समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यदि समय पर सही इलाज और डॉक्टरों की मेहनत न मिलती, तो आज हमारा बेटा हमारे साथ नहीं होता।”
जिला चिकित्सालय गुना की यह सफलता एक बार फिर साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों में भी समर्पित सेवा और विशेषज्ञ उपचार से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।




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