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शरारत गाने पर सस्पेंस खत्म! विजय गांगुली ने तमन्ना भाटिया को लेकर कही ये बात

शरारत गाने पर सस्पेंस खत्म! विजय गांगुली ने तमन्ना भाटिया को लेकर कही ये बात



विजय गांगुली ने उन सुर्खियों को गलत बताया जिनमें यह कहा गया कि तमन्ना भाटिया को शरारत गाने से “रिजेक्ट” कर दिया गया था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि तमन्ना को इस भूमिका के लिए कभी चुना ही नहीं गया था। उनके अनुसार, तमन्ना की जबरदस्त लोकप्रियता और स्टारडम उस दृश्य की मांग से ज्यादा प्रभावशाली हो सकता था। इसलिए मेकर्स ने दो परफॉर्मर्स को चुनने का फैसला किया, ताकि सीन में कहानी को ही केंद्र में रखा जा सके।


उन्होंने यह भी बताया कि कैसे शब्दों को सनसनीखेज बनाने के लिए पेश किया जाता है और “रिजेक्शन” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने लिखा,

“मुझे सिनेमा और उसे बनाने की प्रक्रिया से जुड़ी बातचीत बेहद पसंद है। लेकिन कई बार मैंने खुद को इससे दूर रखा है, क्योंकि अक्सर शब्दों को चुनिंदा तरीके से उठाकर गलत संदर्भ में पेश किया जाता है या शिल्प के बजाय सुर्खियों के लिए सनसनीखेज बना दिया जाता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शरारत गाने और उसके रचनात्मक इरादे पर बात करने के बजाय, दो बेहतरीन कलाकारों की तुलना होने लगी और ‘रिजेक्शन’ जैसे मजबूत लेकिन भ्रामक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जबकि ऐसा कभी भी नहीं था।”


आगे उन्होंने स्पष्ट किया कि तमन्ना भाटिया को शरारत गाने के लिए क्यों नहीं सोचा गया।

“सिनेमा एक सहयोगी कला है। यह सम्मान, सूक्ष्मता और संदर्भ पर आधारित होती है। मैं उम्मीद करता हूं कि हम ध्यान वहीं रखें जहां उसका होना चाहिए—काम पर और उन सभी लोगों पर जो इसमें दिल से मेहनत करते हैं। साफ तौर पर कहना चाहूंगा: तमन्ना भाटिया को कभी विचार में नहीं लिया गया, क्योंकि उनकी स्टार पावर इतनी ज्यादा है कि वह इस सीन की खास जरूरतों पर भारी पड़ सकती थी। धुरंधर में संगीत एक हाई-स्टेक्स पल का हिस्सा है, जहां तनाव बहुत अहम है। मेकर्स ने कहानी की गति और माहौल को बनाए रखने के लिए दो परफॉर्मर्स को चुना, ताकि इस सीक्वेंस में कहानी ही नायक बनी रहे।”


विजय गांगुली की यह सफाई उन सभी सुर्खियों पर विराम लगाती है जिनमें कहा गया था कि तमन्ना को इस गाने से “रिजेक्ट” किया गया। इसके बजाय, यह बयान इस बात पर जोर देता है कि फिल्ममेकर्स के रचनात्मक फैसलों को उनके इरादे और कहानी की जरूरतों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि बेवजह की चर्चाओं और गलत धारणाओं के जरिए।

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