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अभावग्रस्त मानवता की सेवा ही परम धर्म : कैलाश मंथन

अभावग्रस्त मानवता की सेवा ही परम धर्म : कैलाश मंथन


चिंतन मंच ने शुरू किया कंबल वितरण अभियान, मकर संक्रांति तक जारी रहेगी सेवा


ठंड में वृद्धों व जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक कंबल व गर्म वस्त्र भेंट



गुना। ठंड के प्रकोप के बीच मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए चिंतन मंच द्वारा अभावग्रस्तों के लिए कंबल एवं गर्म वस्त्र वितरण अभियान प्रारंभ किया गया है। प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी गरीब बस्तियों, पिछड़े इलाकों एवं सड़कों पर जीवन यापन करने वाले जरूरतमंद लोगों को सम्मानपूर्वक कंबल वितरित किए जा रहे हैं।

अभियान का शुभारंभ चिंतन मंच के संयोजक कैलाश मंथन ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “पीड़ित मानवता की सेवा ही सच्चा धर्म है। अभावग्रस्तों की सहायता करना साकार रूप में ईश्वर की आराधना है।” उन्होंने कहा कि सेवा भाव शुद्ध मन से किया जाए तो वही राष्ट्र की सर्वोपरि सेवा बनता है।


मकर संक्रांति तक चलेगा अभियान

कैलाश मंथन ने बताया कि यह सेवा अभियान मकर संक्रांति तक निरंतर जारी रहेगा। विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों में वृद्धजनों को बैठाकर सम्मानपूर्वक कंबल एवं गर्म वस्त्र भेंट किए जा रहे हैं, जिससे सेवा के साथ सम्मान की भावना भी बनी रहे।


सेवा में जुटी मातृशक्ति

अंतर्राष्ट्रीय नि:शुल्क गीता प्रचार मिशन भारत एवं नारी शक्ति चिंतन मंच की सक्रिय भागीदारी इस अभियान की विशेष पहचान बनी हुई है। समाज की मातृशक्ति तन-मन-धन से सेवा कार्यों में जुटी हुई है। महिलाओं द्वारा कंबल, ऊनी वस्त्र वितरण के साथ-साथ जरूरतमंदों को भोजन, चाय-नाश्ता एवं खिचड़ी भी वितरित की जा रही है।

साथ ही सवा लाख गीता वितरण एवं 12 करोड़ ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ जाप के माध्यम से सनातन धर्म एवं मानव सेवा का संदेश पूरे देश में फैलाया जा रहा है।


स्वेच्छा से मिल रहा जनसहयोग

इस महान अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों से लोग स्वेच्छा से कंबल एवं गर्म वस्त्र दान कर सहयोग कर रहे हैं, जिससे सेवा कार्य और अधिक व्यापक रूप ले रहा है।

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