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रायसेन दरगाह से दिया गया वैश्विक संदेश — “निकाह इबादत है, बालिग होने पर ही करें”

धर्मगुरुओं का संकल्प: बच्चों का बचपन सुरक्षित करना

रायसेन दरगाह से दिया गया वैश्विक संदेश — “निकाह इबादत है, बालिग होने पर ही करें”

बाल विवाह का शारीरिक और मानसिक विकास पर होता है गहरा असर 


रायसेन-समाज में फैली बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ शुक्रवार को रायसेन दरगाह से बदलाव की गूंज उठी। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने साफ शब्दों में कहा कि बच्चे बालिग होने के बाद ही निकाह करें। इस अवसर पर धर्मगुरुओं ने समाज को संकल्प दिलाया कि नाबालिग बच्चों का विवाह अब कभी नहीं कराया जाएगा।

शहर काज़ी जहीर खान ने ‘बाल विवाह मुक्त विश्व अभियान’ के अंतर्गत प्रेरक संदेश जारी करते हुए कहा कि किसी भी धर्म में बच्चों के भविष्य से समझौता मंज़ूर नहीं। इस्लामी शिक्षा के अनुसार भी निकाह तभी जायज़ है जब बच्चे सक्षम और बालिग हों। उन्होंने ज़ोर दिया कि समाज के उलेमा और धर्मगुरु आगे आएं और परंपरा के नाम पर हो रहे अन्याय पर विराम लगाएं।

वैश्विक स्तर पर चल रहा अभियान

कृषक सहयोग संस्थान के निदेशक डॉ. एच. बी. सेन ने बताया कि यह अभियान भारत से उठकर अब वैश्विक स्वरूप धारण कर चुका है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने 27 नवम्बर 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क के नेतृत्व में 39 देशों ने इस मुहिम को अपनाया और अब यह अभियान 12 से 14 सितंबर तक दुनिया भर में सक्रिय है। मंदिरों, मस्जिदों, गिरिजाघरों और अन्य धार्मिक स्थलों से धर्मगुरु बच्चों के बचपन को सुरक्षित करने की अपील कर रहे हैं। सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधि साझा संकल्प ले रहे हैं और भारत की प्रेरक कहानियाँ व अंतरधार्मिक सहयोग के अनुभव छह भाषाओं में प्रसारित हो रहे हैं।

बाल विवाह के सामाजिक दुष्प्रभाव

डॉ. सेन ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार बाल विवाह बचपन की सबसे बड़ी बाधा है। यह केवल शिक्षा ही नहीं रोकता बल्कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी गहरा असर डालता है। खासकर लड़कियों को इसका खामियाज़ा अधिक भुगतना पड़ता है। विवाह के बाद कम उम्र की बच्चियाँ घर-गृहस्थी और मजदूरी के बोझ तले दब जाती हैं। पति-पत्नी के बीच उम्र के फासले से घरेलू हिंसा की आशंका बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, कानूनी उम्र से पहले विवाह करना सीधे तौर पर यौन शोषण की श्रेणी में आता है।

जिला समन्वयक अनिल भवरे ने बताया कि रायसेन दरगाह से दिया गया यह संदेश केवल धार्मिक आग्रह ही नहीं, बल्कि समाज सुधार का आह्वान है। यह मुहिम बाल विवाह को जड़ से उखाड़ने और बच्चों को सुरक्षित, शिक्षा-समृद्ध बचपन देने का प्रतीक बनेगी।उपस्थित जन समूह में संकल्प लेकर इस आह्वान का स्वागत किया।

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