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अतिशय भगबान में नही आपके भावों विश्वास के परिणाम से होता है-मुनिश्री दुर्लभ सागर

अतिशय भगबान में नही आपके भावों विश्वास के परिणाम  से होता है-मुनिश्री दुर्लभ सागर                         

नगर में हो रहा है मुनि श्री दुर्लभ सागर जी का मंगल चातुर्मास 


      आरोन-नगर में चातुर्मास कर रहे परम परम पूज्य आचार्य भगवान 108 श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज एवं शिक्षा प्रदाता   परम पूज्य आचार्य 108 श्री समय सागर जी महामुनि राज के परम प्रवाहक शिष्य श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज का मंगल चातुर्मास धर्ममय नगरी आरोन में हो रहा है परम पूज्य मुनि श्री की धर्म देशना प्रतिदिन स्थानीय श्री शांति नाथ दिगम्बर जैन मंदिर जी में हो रही है धर्मसभा में बोलते हुऐ मुनिश्री ने कहा कि  चमत्कार भगवान की मूर्ति में नहीं बल्कि भक्त के विश्वास से भरे भावों वाले परिणामों से होता है कोई भी मूर्ति चमत्कारी भक्त के विश्वास से बनती है अतः हमें हमारे भाव एवं विश्वासपरिणामके उदय से ही हमारे कर्म उदय में आते हैं हम जैसी भावना भाव या परिणाम करते हैं वैसे ही हम बनते चले जाते हैंसंसार का प्रत्येक प्राणी जीवन में सुखी निरोगी शांत धनवान बनना चाहता है वह चाहता है कि उसके जीवन में उसे यश कीर्ति मां बहुमन सब मिलेलेकिनउसका विश्वास या उसके भाव जैसे होंगे उसके जीवन में वैसे ही परिणाम प्राप्त होंगे मुनि श्री ने अपनी बात को विस्तार से समझाते हुए कर्मकांड शहर का उदाहरण देते हुए बताया कि जीवन जीने का तरीका या जीवन जीने का की कला के लिए व्यक्ति को तीन बिंदुओं पर विचार करना चाहिएपहले बिंदु है कर्म का उदयदूसरा बिंदु है बंद यानी कि भावो के परिणाम अनुसारही हमारे कर्मों का बंद होता है तीसरा महाराज श्री ने बताया उदीड़ना जिसमें जो कर्म उदय में नही आना या जिनका उदय भविष्य में आ ना है हम उन्हे भावों या परिणाम के माध्यय से पहले ही उदय में ले आते ह चौथे पांचवें गुणस्थान मे नही छढे गुणस्थान तक कर्मका उदय हो वो परिणाम बर्धमान के साथ भविष्य बनाने बाला परिणाम उदिड़ना कहलाता है अतः हम जो भी भाव करेंगे वही कर्म हमारे उदय में आएंगे और उनका परिणाम भी हमारे जीवन वैसा ही बन जाएगा जैन मत अनुसार हमारे वीतरागी भगवान हमें कुछ नहीं दे सकते अगर हम यह मानते है ता हम मिथ्या दृष्टि कहलाएंगे हमारे अंदर के भाव हमारे अंदर के परिणाम हमारे अंदर का विश्वास ही भगवान में चमत्कार लाता है अतः हमें अपना जीवन भगवान के साथ पूर्ण आस्था रखते हुए भाव इस प्रकार बनाने  हैं कि हमारे भाव से हमारे जीवन मे कर्म उदय में आ रहे है हमे सदैव मानने वाला बनना है अभिमानी अपनी बात मनबाने वाला नही क्योंकि मानने बाला ही जीवन मे ऊपर जाता है और सर्वमान्य होता है अतः हमें अपने जीवन में अभियान को छोड़कर सदा झुका हुआ रहना है   चातुर्मास में  भक्तगण दूर-दूर से पधार रहे है और परम पूज्य मुनि श्री का मंगल आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं   मुनिश्री के मंगल चातुर्मास अंतर्गत नित्य धार्मिक क्रियाए हो रही है इसी मंगल चातुर्मास अंतर्गत नित्य धार्मिक आयोजन हो रहे है समस्त कार्यक्रम मे श्री आदिनाथ टूस्ट्र अध्यक्ष विजय डोडिया चातुर्मास अध्यक्ष मिंटुलाल बाखर गोशाला अध्यक्ष नरेश चंद उपिस्थत रहे समस्त कार्यक्रम संबंधी जानकारियां के के सरकार द्वारा दी जा रही है

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