Breaking News

अपराध मुक्त जीवन जीना ही मानव जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि- कैलाश मंथन

गुना जिला जेल में बंदियों के हृदय परिवर्तन की प्रशंसनीय सकारात्मक पहल 

आध्यात्मिकता से जुड़कर कैदियों ने अपराध न करने की कसम खाई

अपराध मुक्त जीवन जीना ही मानव जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि- कैलाश मंथन


 गुना। गुना जेल में कैदियों के हृदय परिवर्तन के बारे में जानकारी बहुत प्रेरणादायक है।समाजसेवी कैलाश मंथन के प्रयासों से जेल में बंद कैदियों को आध्यात्मिक ज्ञान और सकारात्मक विचारों के माध्यम से सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।कैदियों में सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।कैदियों को जेल में विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जैसे कि श्रीमद् भागवत गीता,रामायण, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा एवं सभी धर्मों का सत साहित्य उपलब्ध कराया जा रहा है।जेल में कैदियों को राम नाम जप लेखन की पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। ध्यान एवं योग के विशेष सत्र चलाए जा रहे हैं ।प्रत्येक त्यौहार पर बंदियों के बीच समाज सेवी कैलाश मंथन द्वारा अपराध न करने की प्रेरणा दी जा रही है एवं जेल से छूटने के बाद अपराध न करने की शपथ दिलाई जा रही है। जेल प्रशासन के विशेष  प्रयासों से अब तक सैकड़ो कैदियों में सकारात्मक परिवर्तन आया है। गीता जयंती से अब तक कैदियों के बीच सात सत्रों के दौरान धर्म आध्यात्मिक एवं समाज के प्रति जागृति पैदा हुई। जिला जेल में बंदियों ने  भविष्य में अपराध न करने की कसम खाई। जेल परिसर मे मुख्य अतिथि समाजसेवी कैलाश मंथन ने आयोजित कार्यक्रम के दौरान बंदियों को संबोधित करते हुए सजा पूरी  होने के बाद अपराध न करने की कसम खिलाई।  सैकड़ों बंदियों ने शपथ लेते हुए दोनों हाथ उठाकर भविष्य में अपराध न करने की कसम खाई। विराट हिंदू उत्सव समिति चिंतन मंच के प्रमुख कैलाश मंथन ने जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए कहा पाप करने की सजा भोगने के बाद अपराध बोध होना एवं प्रायश्चित स्वरूप भविष्य में कोई भी पाप ना करना ही जीवन को श्रेष्ठ बन सकता है। अपराध मुक्त जीवन जीना एवं कर्तव्य कर्म करना ही जीवन की सबसे बड़ी अमूल्य निधि है। अपराध करने से सदैव बचें।जेल अधीक्षक अतुल सिन्हा एवं जेलर जसवंत सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे बंदी सुधार कार्यक्रम के तहत कैदियों में  सकारात्मक परिवर्तन किया जा रहा है। समाजसेवी कैलाश मंथन द्वारा अपनी सेवाएं जेल प्रशासन को देते हुए अब तक हुए सात कार्यक्रमों के दौरान जेल के अंदर आध्यात्मिक चेतना, राम नाम जप लेखन ,श्रीमद् भागवत गीता स्वाध्याय के द्वारा बड़ा सकारात्मक परिवर्तन किया गया है। वही श्रीमद् भगवद् गीता, रामायण ,सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का निशुल्क वितरण कैदियों को किया गया है। प्रत्येक बैरक में सभी धर्मो के सत साहित्य को रखवाया गया है। कार्यक्रम का संचालन जेल के शिक्षक श्री मुकेश रावत द्वारा किया गया । शिक्षक मुकेश रावत  की अथक मेहनत के परिणाम स्वरूप अनेकों अपराधियों द्वारा अपना जीवन परिवर्तित कर अपराध रहित श्रेष्ठ जीवन अपनाने की सार्थक पहल की गई है।जेल प्रशासन द्वारा बंदी सुधार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि छूटने के बाद कैदी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।गुना जेल में कैदियों के हृदय परिवर्तन की यह पहल बहुत ही प्रशंसनीय है और इससे अन्य जेलों में भी प्रेरणा मिल सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं