पुरानी गल्ला मंडी की बदहाल स्थिति को लेकर उठी आवाज, रहवासियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
न नगर पालिका जिम्मेदार, न मंडी समिति तैयार, रहवासी बोले—अब और बर्दाश्त नहीं
पुरानी गल्ला मंडी की बदहाल स्थिति को लेकर उठी आवाज, रहवासियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
गुना - नगर की सबसे पुराने और व्यस्ततम क्षेत्रों में शुमार पुरानी गल्ला मंडी की बदहाली को लेकर मंगलवार को रहवासी कलेक्टोरेट पहुंचे और जिला प्रशासन के समक्ष गंभीर समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। समाजसेवी नीलम बिंदल के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में रहवासियों ने सडक़, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर चिंता जताई और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि पुरानी गल्ला मंडी में अनेक परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। वहीं, यह इलाका व्यावसायिक दृष्टि से भी अत्यंत सक्रिय है, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद, यहां की सडक़ें गड्ढों से भरी पड़ी हैं, नालियां जाम पड़ी हैं और स्ट्रीट लाइट वर्षों से बंद पड़ी हैं। बुजुर्ग नागरिकों को सुबह टहलने में और आम राहगीरों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है।
नीलम बिंदल ने आरोप लगाया कि जब भी रहवासी समस्या लेकर नगर पालिका जाते हैं तो वहां से यह कहकर लौटा दिया जाता है कि यह क्षेत्र मंडी बोर्ड के अधीन आता है। वहीं मंडी समिति के अधिकारी इसे नगर पालिका क्षेत्र बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। इस असमंजस के चलते पिछले 20 वर्षों से यहां के रहवासी दो विभागों के बीच उलझे हुए हैं। रहवासियों का कहना है कि मतदान के समय तो उन्हें नगर पालिका क्षेत्र का वोटर माना जाता है, लेकिन जब विकास की बात आती है, तो जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल दी जाती है। ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रशासन पहले यह स्पष्ट करे कि पुरानी गल्ला मंडी नगर पालिका के अंतर्गत आती है या मंडी समिति के। ताकि भविष्य में जवाबदेही तय हो सके और जनता को भटकना न पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि चुनावों में नेताओं ने सडक़ों और नालियों के सुधार के नाम पर वोट मांगे थे, लेकिन आज तक कोई कार्य नहीं हुआ है।
रहवासियों की ओर से चेतावनी दी गई कि यदि 15 दिनों के भीतर पुरानी गल्ला मंडी की समस्याओं पर ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो समाजसेवी नीलम बिंदल आमरण अनशन पर बैठेंगी। उन्होंने कहा कि जब एक समाजसेवी महिला को वहां से निकलने में इतनी दिक्कत होती है, तो वहां रहने वाले लोगों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ज्ञापन के अंत में प्रशासन से अपील की गई कि यदि ग्रीन गुना, रोज़ गुना, नया गुना की कल्पना साकार करनी है, तो सबसे पहले पुराने गुना की इस उपेक्षित और बदहाल गल्ला मंडी की ओर ध्यान देना होगा, जहां की सडक़ें सुधारी जाएं, स्ट्रीट लाइटें चालू की जाएं और नालियों की साफ-सफाई की जाए। यदि प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या की अनदेखी करता है, तो यह जनता के अधिकारों के साथ अन्याय होगा।




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