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चतुर्थ कालीन कठिन चर्या के धारी मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज का आरोन आगमन, हुई ऐतिहासिक अगवानी

चतुर्थ कालीन कठिन चर्या के धारी मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज का आरोन आगमन, हुई ऐतिहासिक अगवानी


गुना - आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज एवं नव आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से चतुर्थ कालीन कठोर तप साधना को धारण करने वाले मुनिश्री दुर्लभ सागर जी एवं क्षुल्लकश्री निर्धूम सागर जी महाराज का मंगलवार को आरोन नगर में वर्षायोग हेतु आगमन हुआ। मुनि संघ सोमवार को सिरोंज से विहार कर आरोन की ओर प्रस्थान करते हुए ग्राम ढिमरयाई में रात्रि विश्राम के बाद मंगलवार सुबह आरोन पहुंचे। मुनि संघ की अगवानी के लिए आरोन जैन समाज अध्यक्ष विजय डोडिया एवं मंत्री संजय जैन कंचू के नेतृत्व में समाज के सभी संगठनों सेवा दल, महिला मंडल, पाठशाला परिवार, जैन मिलन, युवा जैन मिलन, गौशाला समिति एवं श्रमण संस्कृति सेवा दल ने विशेष ड्रेस कोड में भाग लिया। सिरसी रोड स्थित जैन समाज अध्यक्ष विजय डोडिया के वेयर हाउस पर प्रात: 8 बजे मुनि संघ की भव्य अगवानी की गई। इसके पश्चात मुनि संघ को शोभायात्रा के रूप में नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बड़े जैन मंदिर लाया गया।

बड़े जैन मंदिर में मुनि श्री के पावन सानिध्य में जिनेन्द्र भगवान की शांतिधारा की गई, जिसका मंत्रोच्चार मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज ने स्वयं अपने मुखारविंद से किया। शांतिधारा का सौभाग्य महावीर कलेशिया एवं संजय जैन भगवन्तपुर को प्राप्त हुआ। नगर में मुनि श्री के आगमन को लेकर भारी उत्साह का वातावरण रहा। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पाद प्रक्षालन किए और जेसीबी से पुष्पवर्षा कर मुनि संघ का अभिनंदन किया। बाद में नियम सागर भवन में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने कहा कि जैसे आज आरोन में ऐतिहासिक आगवानी हुई है, वैसे ही आगामी चार माह का यह चातुर्मास आत्म साधना और संयम का ऐतिहासिक अवसर बने। कार्यक्रम का संचालन संजीव रामपुर ने किया। श्रद्धा, उल्लास और संयम से परिपूर्ण यह आयोजन नगर के लिए एक आध्यात्मिक पर्व बन गया, जिसकी स्मृतियाँ वर्षों तक जीवित रहेंगी।  

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