ग्रह बनाम प्लास्टिक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लिऐ दिया संदेश
ग्रह बनाम प्लास्टिक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लिऐ दिया संदेश
गुना -पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल पर पृथ्वी पर वायुमंडल व जीवन को शुद्ध रखने बिशय-ग्रह बनाम प्लास्टिक पर कुलदीपिका सिंह मैमोरियल पर्यावरण जागरुकता अभियान के तहत सुचेताहम्बीर सिंह, निस्वार्थ स्वाधीन पर्यावरण, शिक्षा प्रसार-सामाजिक, ऑनर-अर्थऑवर-डब्ल्यूडब्ल्यूएफ क्लाईमेट चेंज नियंत्रण जागरुकता, स्वच्छ भारत अभियान द्वारा कम्पोजिट माध्यमिक विद्यालय टेडी बगिया आगरा में छात्रों व टेडी बगिया चौराहे पर आमजन से कहा कि मनुष्य की आधुनिकता व विलासिताओं की इच्छा पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों दोहन और उनसे निर्मित पौलिथिन व प्लास्टिक जैसे उत्पादकों का अव्यवस्थित उपयोग व असक्षम निस्तारण प्रबंधन पृथ्वी पर कई प्रकार के प्रदूषण, आपदाओं (बाढ, बीमारी आदि) और महामारी जैसे हालातों का कारण है जिसके कारण पानी, खाना व स्वांस के साथ प्लास्टिक के कण मनुष्य व हर प्राणी के शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। जिससे मनुष्य सभी जलीय व थलीय जीव खतरे में हैं। हमें पर्यावरण व प्रकृति की मर्यादाओं को नही लांघना है अन्यथा प्राकृतिक संतुलन के लिऐ इससे भी भयानक त्रासदी भी आऐंगी। विश्व स्तर पर वर्तमान में औसतन करीब 28 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष और पिछले बर्ष करीब 3500 लाख टन निकल रहा प्लास्टिक कचडा से भविष्य में समुद्र व जमीन पर बहुत से जीव खत्म हो जाऐंगे। इसलिऐ विश्व समुदाय को पर्यावरण संरक्षण, जीवन संरक्षण व आर्थिक संतुलन के लिए यर्थाथ रुप से संसाधनों का संतुलित उपयोग ही पर्यावरण और जीव संरक्षण के लिए कारगर रहेगा। हम्बीरसुचेता सिंह ने भी छात्रों व आमजन को संदेश देने के लिऐ पोस्टर लगाऐ और पर्चे भी वितरण किऐ कि पर्यावरण के लिऐ जीवनषैली अपनाते हुऐ सभी लोग पौलिथिन उपयोग को ना कहें और किसी प्रकार की प्लास्टिक को नदी नाले, पानी निकास की नालियों, खाद्य पदार्थयुक्त पौलिथिन को न फेंके व वृक्षारोपण अवश्य करें। फेंकी गई प्लास्टिक व पौलिथिनों से गाय, कछुआ, पंक्षी जैेसे बहुत जानवर मर रहे हैं गाय के पेट से करीब 10 से 80 किलोग्राम तक पौलिथिनें निकल रही हैं तथा पौलिथिनें नदी व तालाबों में जाकर इनके बहाव को रोकने के साथ ही जमींन के अंदर पानी की रिसन प्रक्रिया को भी बाधित कर रही हैं जो जमीन में पानी की कमी का भी कारण है। यदि प्लास्टिक प्रदूषण व गी्रनहाउस गैसों (कार्बन डाईऔक्साइड) का उत्सर्जन इसी प्रकार बढता रहा तो ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव की तरह से असंभावित भीषण प्राकृतिक आपदाओं के संकेत भी हैं। यदि समय रहते बढते प्लास्टिक व पौलिथिन प्रदूषण रोकने के लिऐ ग्लोबल वार्मिंग रोकने के जीरो कार्बन उत्सर्जन तयलक्ष्य जैसे कदम नही उठाऐ तो प्लास्टिक प्रदूषण व ई-कचरा के दुष्परिणामों को एक निश्चित समय के बाद रोका नही जा सकेगा। इसके लिऐ स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छ ईधन, स्वच्छ तकनीक, ऊर्जा संरक्षण के उपाय व हरित जीवनशैली से सहायता मिलेगी।




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