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अंचल में पचास फीसदी मंदिर भगवान श्रीराम के - कैलाश मंथन

राम नवमीं पर विराट हिन्दू उत्सव के होंगे भव्य आयोजन

अंचल  में पचास फीसदी मंदिर  भगवान श्रीराम के - कैलाश मंथन

108 प्रमुख राम मंदिरों में होगी महाआरती, जुटेंगे सैकड़ों श्रद्धालु कार्यकर्ता



गुना। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर भव्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। विराट हिन्दू उत्सव समिति, चिंतन मंच के संस्थापक एवं संयोजक कैलाश मंथन के मुताबिक राम नवमी 17 अप्रैल  को परंपरानुसार अंचल के सभी राम मंदिरों, वैष्णव मंदिरों सहित धार्मिक केंद्रों पर चैत्र शुक्ल नवमीं को दोपहर 12 बजे महाआरती में हजारों भक्त एवं कार्यकर्ता सम्मिलित होंगे। हिउस अध्यक्ष कैलाश मंथन ने बताया कि समिति के तहत अंचल एवं शहर के 108 राम मंदिरों में बनाई गई उत्सव समितियों के माध्यम से भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम एवं भव्यता से मनाया जा रहा है। शहरी इलाकों में करीब आधा सैकड़ा राम मंदिरों सहित अंचल के अन्य मंदिरों में महाआरती के साथ बौद्धिक कार्यक्रम, चिंतन गोष्ठियां, संकीर्तन, भजन संध्या, अखंड रामायण, सुंदरकांड, गीता पाठ आदि कार्यक्रम रखे गए हैं। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन के अनुसार सरकारी एवं निजी रिकार्ड के अनुसार गुना अंचल के 1100 मंदिरों में से पचास फीसदी मंदिरों में भगवान श्रीराम एवं राम दरबार के विग्रह स्थापित हैं। पिछले एक दशक में बने मंदिरों की संख्या अलग से है। समिति ने प्रथम दौर की सक्रियता के हिसाब से 108 राम मंदिर चिन्हित किए हैं, जहां पूर्व में कोई कार्यक्रम नहीं होते थे।  ऐसे मंदिरों में अब रामभक्त पहुंचकर राम जन्मोत्सव मनाएंगे।

हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने 17 अप्रैल  को रामनवमी पर सभी स्थानों पर निकलने वाले चल समारोहों का स्वागत करने एवं निकट के राम मंदिरों में होने वाली महाआरती एवं कार्यक्रमों में सम्मिलित होने का अनुरोध सनातन धर्माबलंवियों से किया है।


पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर होंगे विशेष मनोरथ, पलना महोत्सव

पुष्टिमार्गीय परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख एवं जिलाध्यक्ष कैलाश मंथन ने बताया कि जिले के करीब सवा सौ पुष्टिमार्गीय सत्संग मंडलों एवं श्रीनाथ जी के मंदिरों में भगवान राम के जन्मोत्सव पर विशेष मनोरथ आयोजित किए गए हैं। प्रात: बेला में नंद महोत्सव, पालना उत्सव के दर्शन होंगे। एवं राम नवमीं पर विशेष बधाई गीत, वार्ता प्रसंग एवं सत्संग संकीर्तन आदि कार्यक्रम पुष्टिमार्गीय भक्ति केंद्रों पर आयोजित किए जा रहे हैं।

23 अप्रैल को शक्तिपर्व के रूप में मनाई जाएगी श्री हनुमान जयंती

वहीं अंचल में 6 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के दिन श्री हनुमान जयंती शक्तिपर्व के रूप में मनाई जाएगी। विराट हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि पिछले एक दशक से श्री हनुमान जयंती को शक्तिपर्व के रूप में मनाया जा रहा है। हिउस प्रमुख ने सभी धर्मावलंबियों से निकट के धार्मिक केंद्रों में पहुंचकर सामाजिक एवं धार्मिक एकता प्रदर्शित करने का आव्हान किया।

भारतीय काल गणना से होता है विश्व की समय इकाई का निर्धारण-कैलाश मंथन

 अंचल में चैत्रीय नवरात्र का शुभारंभ भगवान भास्कर को अर्ध्य देकर हुआ। इस दौरान विराट हिन्दू उत्सव समिति, अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद, नारी शक्ति चिंतन मंच के कार्यकर्ताओं एवं मातृशक्ति द्वारा वृहद स्तर पर भगवान सूर्य नारायण की आराधना की गई। वहीं मंगलवार को सुबह शुभ मुर्हुत में कलश स्थापना हुई। हिउस के तहत कलश स्थापना के साथ  नाम  जप, पाठ आदि किए गए। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि नवसंवत्सर के दिन गुडी पड़वा ही सृष्टि की उत्पत्ति का दिवस माना जाता है। विराट हिन्दू उत्सव समिति के संस्थापक कैलाश मंथन ने नव संवत्सर पर चिंतन हाउस में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम में कहा भारतीय काल गणना से ही विश्व के सभी राष्ट्रों के कैलेण्डर एवं समय की इकाई निर्धारित होती है। विक्रम संवत पूर्णत वैज्ञानिक गणना पर आधारित है।  भारतीय काल पंचाग समय की सूक्ष्मतम प्रमाणिक इकाई की गणना का प्रतीक है। विश्व के सभी कैलेण्डर परिवर्तनशील हैं, लेकिन भारतीय विक्रम संवत की काल गणना में आज तक एक भी पल का अंतर नहीं आया है। सूर्योंदय से अस्त तक प्राकृतिक बदलाव, सूर्य-चंद्रग्रहण, नक्षत्रों की गतियों का विलक्षण समय निर्धारण इस पंचाग से होता है। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया महाराजा विक्रमादित्य ने 2081 वर्ष पहले अवंतिका नगरी उज्जैन में प्रजा का ऋण माफ करते हुए अपने महान ज्योतिषियों से वैज्ञानिक काल निर्धारण करवाया। लाखों वर्ष पूर्व सृष्टि के निर्माण के बाद समय का फेरबदल होता रहा। त्रेता में राम संवत, द्वापर युग में युधिष्ठर संवत, कृष्ण संवत के बाद कलियुग में विक्रम संवत ही सर्वाधिक प्रमाणिक  माना गया 

श्रीमद् भगवद् गीता वितरण का 33 वां दौर आरंभ

हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि नवसंवत से नि:शुल्क गीता जी का वितरण का दौर एवं चिंतन मीडिया सेंटर का शुभारंभ पूजा अर्चन के साथ हुआ। श्री मंथन ने वि.स. 2081 से श्रीमद् भगवद् गीता प्रचार अभियान के तहत नि:शुल्क गीता वितरण का 33 वां दौर शुरू किया। अब तक 32 हजार से अधिक गीताजी की प्रतियां चिंतन मंच संयोजक कैलाश मंथन द्वारा वितरित की जा चुकी हैं। इस अवसर श्री मंथन ने कहा कि नवसंवत्सर 2081 सभी के जीवन में खुशियां लाए। सृष्टि के शुभारंभ के प्रथम दिवस को ही संवत्सर दिवस कहा जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सत्ययुग का प्रारंभ हुआ था। इसी दिन प्रलयकाल में मत्स्यावतार का प्रार्दुभाव हुआ था। विक्रम संवत के महीनों के नाम आकाशीय नत्रक्षों के उदय अस्त से संबंध रखते हैं यही वार, तिथि तथा दिनांक के संबंध में भी है। वे भी सूर्य, चंद्र की गति पर आश्रित हैं। सारांश यह है कि विक्रम संवत अपने अंग, उपांगों सहित पूर्णत: वैज्ञानिक सत्य पर स्थित है। चैत्र शुल्क प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिनों को ही बासंती नवरात्र कहते हैं। वहीं नवरात्रि के मौके पर घरों में घट स्थापना की गई एवं माता की ज्योति जलाई गई।

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