विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा श्री राम जी की यात्रा एवं पालकी निकाली गई
विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा श्री राम जी की यात्रा एवं पालकी निकाली गई
गुना -श्री रामनवमी शुभ अवसर पर श्री राम जी की यात्रा एवं पालकी गुना बासखेड़ी से चल समारोह निकाला गया हनुमान चौराहा जयस्तम चौराहे सदर बाजार होते हुए विभिन्न मार्ग पर यात्रा निकाली गई विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के सभी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे सुरेश शर्मा जी मुकेश कुशवाहा जी भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा जिला मीडिया प्रभारी मुकेश ओझा जी S.C मोर्चा के महामंत्री नरेंद्र अहिरवार जी पिछड़ा वर्ग मोर्चा जिला उपाध्यक्ष संजीव कुशवाहा जी एवं समस्त कार्यकर्ता उपस्थित रहे भगवान राम को विष्णु का अवतार माना का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में मानव अवतार लिया था। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवनकाल में कई कष्ट सहते हुए भी मर्यादित जीवन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विपरीत परिस्थियों में भी अपने आदर्शों को नहीं त्यागा और मर्यादा में रहते हुए जीवन व्यतीत किया। इसलिए उन्हें उत्तम पुरुष का स्थान दिया गया है।
इस दिन विशेष रूप से भगवान राम की पूजा अर्चना और कई तरह के आयोजन कर उनके जन्म के पर्व को मनाते हैं। वैसे तो पूरे भारत में भगवान राम का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन खास तौर से श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में इस पर्व को बेहद हर्षोल्ललास के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के समय अयोध्या में भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से भक्तगणों के अलावा साधु-संन्यासी भी पहुंचते हैं और रामजन्म का उत्सव मनाते हैं।
रामनवमी के दिन आम तौर पर हिन्दू परिवारों में व्रत-उपवास, पूजा पाठ व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। राम जी के जन्म के समय पर उनके जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है और खुशियों के साथ उनका स्वागत किया जाता है।कई घरों में विशेष साज-सज्जा कर, घर को पवित्र कर कलश स्थापना की जाती है और श्रीराम जी का पूजन कर, भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।इस दिन विशेष तौर पर श्रीराम के साथ माता जानकी और लक्ष्मण जी की भी पूजा होती है।
माता कैकयी द्वारा राम जी के पिता महाराजा दशरथ से वरदान मांगे जाने पर, श्रीराम ने राजपाट छोड़कर 14 वर्षों के वनवास को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया और वनवास के दौरान कई असुरों समेत अहंकारी रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की। अयोध्या छोड़ते समय श्रीराम के साथ माता जानकी और भाई लक्ष्मण भी 14 वर्षों के वनवास पर गए। यही कारण है कि रामनवमी पर उनकी भी पूजा श्रीराम के साथ की जाती है।




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