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हरि भजन में ही सुख शांति आनंद है उसी में शंकर जी सदा आनंद मग्न रहते हैं महात्मा दयाबती बाई जी

हरि भजन में ही सुख शांति आनंद है उसी में शंकर जी सदा आनंद मग्न रहते हैं महात्मा दयाबती बाई जी     


                      

गुना -मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित कोलहू पुरा शिव मंदिर के पास में दो दिबसीय शिव कथा सत्संग समारोह के प्रथम दिवस हरिद्वार से पधारी सतगुरु देव श्री सतपाल जी महाराज  की शिष्या महात्मा दयाबती बाई जी ने कहा आज संसार में लोग दुखी अशांत हैं इसका कारण लोग बहिर मुखी हो चुके हैं केवल भौतिक बात को महत्व दे रहे हैं लेकिन सुख शांति अंतर जगत में है भगवान शंकर सदा ध्यान मग्न आनंदित रहते हैं माता पार्वती जी क के पूछने पर कहते हैं उमा कहूं मैं अनुभव अपना सत हरि भजन जगत सब सपना, हे पार्वती हरि भजन ही सत्य है बाकी  संसार सपना है और इसमें सुख नहीं है इसलिए हम यदि अपने जीवन में सुख शांति आनंद चाहते हैं तो हम भी उस ध्यान की विधि एवं अविनाशी नाम को जाने जिससे हमारा जीवन भी सुख शांति और आनंद मय हो सके और हम भी अंतर्मुखी हो जाएं महात्मा धर्मावती ने  बताया भगवान शंकर कैलाश को छोड़कर माता सती जी को साथ में लेकर सत्संग सुनने जाया करते थे सत्संग की महिमा जगत में महान है सत्संग से ही विवेक की प्राप्ति होती है सत्संग से ही जगत का रहस्य खुल जाता है और सार को हम प्राप्त करने लगते हैं जिससे यह जीवन महान हो जाता है महात्मा सुनिधि भजन बताया सत्संग की महिमा प्रभु की मेहरबानी ज्ञान की है गंगा इसमें नहा ले तू प्राणी इसलिए अपने-अपने समय में सभी ने सत्संग को महत्व दिया इसलिए भगवान राम कहते हैं दूसरी रति मम कथा प्रसंगा हम सत्संग से प्रेम करें समिति के लोगों ने आग्रह किया है आप भी अपने परिवार सहित  सत्संग में आकर लाभ प्राप्त करें

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