परस्त्री में मातृत्व भाव का उज्जवल आदर्श थे वीर शिवाजी- श्री मंथन
परस्त्री में मातृत्व भाव का उज्जवल आदर्श थे वीर शिवाजी- श्री मंथन
महाराज शिवाजी का ध्येय था हिन्दवी स्वराज्य का संस्थापन - मंथन
विराट हिन्दू उत्सव समिति चिंतन मंच ने किया वीर शिवाजी का पुण्य स्मरण
गुना। देश पर, धर्म पर, गायों पर, ब्राह्माणों पर, मंदिरों पर, सती नदियों पर और असहाय जनता पर जो अत्याचार निरंकुश यवन शासकों द्वारा हो रहे थे शिवाजी का वीर ह्दय उस आर्त क्रन्दन को सह नहीं सका। युवा शिवाजी ने धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए भवानी (शिवाजी की तलवार) की शरण ली। उक्त विचार विराट हिउस, चिंतन मंच के तहत आयोजित चिंतन श्रृंखला में हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक हिन्दू साम्राज्य दिवस के मौके पर व्यक्त किए। इस मौके पर मंथन ने वीर शिवाजी के व्यक्तित्व पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि हिन्दू परंस्पर हारे लड़ें, यह महाराज शिवाजी को अभीष्ट नहीं था। सेनापति जयसिंह के परामर्श से शिवाजी दिल्ली में औरंगजेब से मिले, लेकिन धूर्त मुगल औरंगजेब ने उन्हें कैद कर लिया पर कौशल से वे निकल आए। महाराष्ट्र लौटने पर रायगढ़ दुर्ग में सन 1674 ईस्वी में महाराज शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ। बीजापुर नरेश, दक्षिण के शासकों ने उन्हें अग्रणी माना। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि महाराज शिवाजी का ध्येय था हिन्दवी स्वराज्य का संस्थापन और उसके लिए वे सतत संलग्र रहे। मुस्लिम इतिहासकार लिखते हैं कि शिवाजी ने कभी किसी मस्जिद, कुरान अथवा किसी धर्म को मानने वाली स्त्री को हानि नहीं पहुंचाई। पर स्त्री मात्र में मातृभाव का उज्जवल आदर्श महाराज शिवाजी का किसी धर्म से द्वेष नहीं था। उन्होंने तो अत्याचार एवं अधर्म के विरूद्ध तलवार उठाई थी। उनका सब कुछ राष्ट्रीय एवं संस्कृति की सुरक्षा के लिए था। 53 वर्ष की अवस्था में राजगढ़ दुर्ग में ही उन हिन्दूपति ने शरीर छोड़ा। उनका साम्राज्य वह तो कभी उनका नहीं था उसे तो उन्होंने अपने गुरु समर्थ स्वामी रामदास के चरणों पर चढ़ा दिया था और समर्थ के साम्राज्य का ही प्रतीक है वह भगवा ध्वज। महाराज शिवाजी का नाम इतिहास के पृष्ठों में एक नि:स्पृह महान कर्मयोगी के रूप में एवं महान गुरुदेव के प्रतिनिधि महान शिष्य के रूप में जिसने अपना साम्राज्य गुरु के चरणों में अर्पित किया।
देशधर्म के लिए मरने का आदेश देती है गीता- कैलाश मंथन
आतंकवाद पर काबू पाने के लिए गीता का प्रचार जरूरी-कैलाश मंथन
श्री मद् भगवद्गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग
नि:शुल्क वितरण विराट गीता प्रचार अभियान में तेजी
गुना। देश धर्म की रक्षा करना प्रत्येक भारतवासी का धर्म है। पाखड़वाद पर प्रहार एवं भारतमाता के प्रति भक्ति की भावना जाग्रत करना ही वर्तमान का सर्वश्रेष्ठ कर्तव्य है। श्रीमद् भगवद गीता प्रचार अभियान के तहत विराट हिन्दू उत्सव समिति प्रमुख कैलाश मंथन ने नि:शुल्क गीता वितरण कार्यक्रम में विचार व्यक्त किए। गीता हमें मानव जीवन के वास्तविक चरम लक्ष्य की ओर ले जाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन रूपी भारत को देश धर्म के लिए मर मिट जाने का सच्चा धर्म उपदेश दिया था। उक्त बात हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने चिंतन हाउस में श्रीमद् भगवद् गीता प्रचार एवं अभियान के दौरान कहीं। उक्त अभियान के तहत नि:शुल्क गीता 33हजार परिवारों तक पहुंचाई गई हैं । श्रीमद् भगवद् गीता देश धर्म और भक्ति के प्रति हमारा दायित्व बोध कराती है। शरीर नाशवान है आत्मा अविनाशी फिर भय कैसा। देश के लिए मर मिटना है सच्चा धर्म है। भगवान के अवतार का प्रयोजन भी यही है। इस अवसर पर चिंतन बैठक में प्रस्ताव पारित करते हुए कहा गया कि भारत सरकार देश के प्रत्येक सैनिक एवं घर-घर तक गीता के राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा देते हुए स्थापित करवाएं तभी आतंकवाद पर काबू पाया जा सकता है।
घर-घर गीता जन-जन गीता महाप्रचार अभियान का शुभारंभ
गुनाअंतर्राष्ट्रीय नि:शुल्क गीता प्रचार मिशन, नारी शक्ति चिंतन मंच, विराट हिन्दू उत्सव समिति के तहत बसंत पंचमी से घर-घर गीता जन-जन गीता महाप्रचार अभियान का शुभारंभ हुआ। अब तक 33 दौर में 33 हजार गीता की प्रतियां नि:शुल्क वितरित की जा चुकी हैं। अभियान प्रमुख कैलाश मंथन के मुताबिक प्रत्येक देशवासी के हाथों में श्रीमद् भगवद गीता हो एवं प्रत्येक घर में गीता के विचार स्थापित हो, इस उद्देश्य से निशुल्क गीता वितरण करने का आव्हान हर भारतवासी से किया जा रहा है। गीता हमारा भारतीय दर्शन है। भगवान कृष्ण की अमृतवाणी गीता के विचार आत्मसात करने से आत्मबल की प्राप्ति होती है। मृत्यु का भय दूर होता है एवं जीवन के परम लक्ष्य की प्राप्ति होती है। विराट हिउस, चिंतन मंच प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि देश के पन्द्रह प्रांतों में मप्र, उप्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, बिहार, असम, महाराष्ट्र सहित अनेकोनेक राज्यों में करीब एक हजार मातृशक्ति गीता प्रचार कर स्वयं निजी तौर पर गीता जी को घर-घर एवं जन-जन में पहुंचा रही है। अब तक करीब सवा लाख प्रतियां अंतर्राष्ट्रीय नि:शुल्क गीता प्रचार मिशन भारत नारी शक्ति चिन्तन मंच के तहत वितरण हो चुकी हैं ।




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