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भ्रामरी प्राणायाम का मानव जीवन पर प्रभाव:- योगाचार्य महेश पाल

भ्रामरी प्राणायाम का मानव जीवन पर प्रभाव:- योगाचार्य महेश पाल



गुना- प्राणायाम, योग अभ्यास की एक शाखा है शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मानव जाति के लिए बेहद फायदेमंद है भ्रामरी एक संस्कृत शब्द है जो भ्रमर से लिया गया है जिसका अर्थ है गुनगुनाती काली मधुमक्खी प्राणायाम  शब्द भी संस्कृत से आया है। इसका शाब्दिक अनुवाद है, "सांस का विस्तार"। प्राण वह जीवन शक्ति है जो हमारे शरीर को ऊर्जा से भर देती है। यह मन और चेतना के बीच एक मजबूत संबंध बनाता है। योगाचार्य महेश पाल भ्रामरी प्राणायाम के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हैं कि  भ्रामरी प्राणायाम 15वीं शताब्दी के स्वामी स्वात्माराम के ग्रंथ हठ योग प्रदीपिका में वर्णित कई प्राणायाम तकनीकों में से एक है।भ्रामरी प्राणायाम का नाम ब्लैक इंडियन बी, भ्रामरी से लिया गया है। इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय जब हम सांस छोड़ते हैं तो ओम ध्वनि निकलती है वह गले के उपास्थि में मधुमक्खी के गुंजन की ध्वनि के समान होती है, इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है। भ्रामरी प्राणायाम को अंग्रेजी में हम्मिंग ब्रीद  के नाम से भी जाना जाता है अक्सर, जब हम तनावग्रस्त या चिंतित होते हैं तो नींद हमसे दूर हो जाती है। हमारा मस्तिस्क ढेर सारे विचारों के साथ दौड़ता रहता है और नींद को कहीं पीछे छोड़ देता है। अपने विचारों को आराम देने और शांत करने के लिए एवं शरीर के बेहतर ढंग से काम करते रहने के लिए मस्तिष्क का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक माना जाता है हालांकि चिंता और तनाव की बढ़ती समस्याओं ने मस्तिष्क की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है मस्तिष्क पूरे शरीर के संचालन का काम करता है ऐसे में इस अंग में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का असर पूरे शरीर की कार्य प्रणाली पर देखा जा सकता है मस्तिष्क के साथ-साथ संपूर्ण शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने के लिए हमें भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास काफी उपयोगी साबित होता है क्योंकि यह प्राणायाम शरीर और मन के बीच संतुलन बनाए रखना में सहायक है भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क को रीबूट करके तंत्रिकाओं को आराम देने हारमोंस के स्तर को ठीक बनाए रखने और तनाव-चिंता जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करने में फायदेमंद होता है एक रिसर्च के अनुसार भ्रामरी प्राणायाम के नियमित अभ्यास से पैरा सिंपैथेटिक प्रभुत्व में वृद्धि के माध्यम से नींद और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है नाइट्रिक ऑक्साइड की बढ़ती अभिव्यक्ति और ऑक्सीजन अवशोषण पर इसके प्रभाव के कारण भ्रामरी के सकारात्मक प्रभाव के उभरते प्रमाण भी देखे गए हैं मानव परानसल साइनस लगातार बड़ी मात्रा में नाइट्रस ऑक्साइड का उत्पादन करते हैं और गुनगुना ध्वनि कंपन वायु दोलन पैदा करते हैं जो बदले में साइनस और नाक गुहा के बीच हवा के आदान-प्रदान को बढ़ाते हैं बड़ा हुआ नाक में नाइट्रिक ऑक्साइड कोविद-19 की रोकथाम और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि नाइट्रिक ऑक्साइड सूजन-रोधी होती है और बैक्टीरिया वायरस, फंगल और परजीवी संक्रमणों के खिलाफ गैर विशिष्ट मेजबान रक्षा में योगदान देता है स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भ्रामरी प्राणायाम को दैनिक अभ्यास में शामिल करने से एक बहुत मजबूती मिलती है धीमी और सुसंगत सांस के उपयोग के साथ-साथ गुनगुनाती ध्वनि कंपन के परिणाम स्वरूप स्वायत्त तंत्रिका तंत्र में वृद्धि कम रक्तचाप सहित हृदय संबंधी  मापदंडों फेफड़ों के कार्य में वृद्धि और ध्यान में वृद्धि से संबंधित कई मानसिक और शारीरिक परिवर्तन देखे गए हैं l भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए किसी शांत एकांत जगह पर सुखासन में बैठकर सद्मुखी मुद्रा का चयन करते हैं उसके पश्चात 8 से 10 बार लंबी गहरी सांस लेते हैं फिर अपने हाथ के अंगूठे से दोनों कानों को बंद कर लेते हैं दोनों तर्जनी उंगली को आज्ञा चक्र के पास रखते हैं मध्यम उंगली को आँखों पर रखते है अनामिका उंगली को नासिका के पास और कनिष्ठ उंगलियों होठों के उपर रखते है उसके पश्चात लंबी गहरी सांस भरते हैं फिर धीरे-धीरे ओम ध्वनि के साथ गुंजन करते हुए इस प्राणायाम को करते हैं यह प्रक्रिया 1 मिनट से लेकर 5 मिनट तक लगातार दोहराई जाती है, भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास से कई लाभ होते हैं जिसमें तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन, चिंता, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन आदि रोगों में लाभकारी है एवं एकाग्रता बढ़ाने आत्मविश्वास बढ़ाने मन को शांत रखने मैं एवं बच्चों में याददाश्त  बढ़ाने और पीनियल और पिट्यूटरी ग्रंथियां को उत्तेजित करके उन्हें लाभ पहुंचता है हार्ड ब्लॉकेज को रोकता है, बुद्धि तीक्ष्ण करता है गहरी नींद के लिए यह प्राणायाम काफी लाभदायक भ्रामरी प्राणायाम करने से पहले हमें कुछ सावधानियां रखनी चाहिए जिसमें जिनको कान और नाक के संक्रमण है वह यह अभ्यास ना करें इस प्राणायाम का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए यह अभ्यास सुबह के समय करने पर ज्यादा उपयोगी सिद्ध होता है भ्रामरी प्राणायाम एक सांस लेने का अभ्यास है इसकी मुख्य विशेषता यह है कि जब संवेदना के सभी 6 द्वारा बंद हो जाते हैं तो अंदर की ओर एक कंपित गुंजन ध्वनि सुनाई देती है जो जो हमारे शरीर और दिमाग के बीच एक सकारात्मक संबंध विकसित करती है इसलिए हमें हमारे जीवन में योग और प्राणायाम को जरूर शामिल करना चाहिए जिससे कि विभिन्न प्रकार की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बच सके और हमारे जीवन को श्रेष्ठ कार्यों में लगाकर  हमारे जीवन की यात्रा को सफल बना सके

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