लक्ष्मी के शुभ कदम: दीपावली पर घर में आने का मंगल संकेत
दीपावली पर विशेष-
लक्ष्मी के शुभ कदम: दीपावली पर घर में आने का मंगल संकेत
दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति का सबसे उज्ज्वल उत्सव है। यह केवल रोशनी और उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि समृद्धि, शुद्धता और शुभता का प्रतीक भी है। इस दिन माता लक्ष्मी का स्वागत “शुभ कदमों” से किया जाता है — जो विश्वास, श्रद्धा और सौंदर्य का सुंदर संगम है।
लक्ष्मी के कदमों का अर्थ
हिंदू मान्यता के अनुसार, दीपावली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उन घरों में प्रवेश करती हैं जो स्वच्छ, प्रकाशित और श्रद्धा से भरे हों।
मुख्य द्वार या पूजा स्थल पर चावल, सिंदूर या आटे से बनाए गए “शुभ कदम” यह प्रतीक हैं कि देवी स्वयं उस घर में प्रवेश कर रही हैं।
कदमों की दिशा अंदर की ओर होती है — यह इस बात का संकेत है कि समृद्धि और सुख भीतर आ रहे हैं।
तैयारी और सजावट का महत्व
दीपावली से पहले घर की सफाई केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धता के लिए भी की जाती है। माना जाता है कि स्वच्छता ही लक्ष्मी का प्रथम निमंत्रण है।
संध्या के समय दीप जलाकर जब घर के आंगन में लक्ष्मी के पांव बनाए जाते हैं, तो वह क्षण मानो आस्था की ज्योति से जगमगा उठता है।
कदमों के साथ रंगोली, दीपमालाएं और पुष्प सजावट इस परंपरा को और भी पवित्र बनाती हैं।
आधुनिक समय में प्रतीकात्मक अर्थ
आज जबकि जीवन की गति तेज़ और तकनीक प्रधान हो चुकी है, लक्ष्मी के शुभ कदम हमें यह स्मरण कराते हैं कि असली समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि घर के संस्कार, आपसी प्रेम और शांति में है।
दीपावली की रात जब हर घर में दीप जलते हैं, तो वे केवल अंधकार मिटाने के लिए नहीं, बल्कि मन के संशय और नकारात्मकता को दूर करने के लिए भी जलाए जाते हैं।
एक परंपरा, जो आस्था से जुड़ी है
लक्ष्मी के कदम बनाना कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि अपने घर को पवित्र भाव से सजाने की सुंदर परंपरा है।
यह परंपरा हमें सिखाती है कि “जहाँ स्वच्छता, सद्भावना और श्रद्धा होती है, वहीं सच्ची लक्ष्मी निवास करती हैं।”
दीपावली के इस शुभ पर्व पर जब हम लक्ष्मी के शुभ कदमों को घर की देहरी पर अंकित करते हैं, तो वास्तव में हम केवल देवी का स्वागत नहीं करते — बल्कि अपने भीतर की अच्छाई, सकारात्मकता और नई शुरुआत का भी अभिनंदन करते हैं।
यही है दीपावली का सच्चा संदेश – “अंधकार से प्रकाश की ओर, दुर्भावना से सद्भावना की ओर।”




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