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श्री कैलाश मंथन ने गीता को घर-घर तक पहुंचाकर रचा इतिहास

श्री कैलाश मंथन ने गीता को घर-घर तक पहुंचाकर रचा इतिहास



गुना-देश में आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भावना को बल देते हुए श्री कैलाश मंथन ने पूरे भारत में श्रीमद्भगवद् गीता के प्रचार-प्रसार का अभियान चलाकर एक मिसाल कायम की है। उनके प्रयासों से हजारों लोग गीता के आदर्शों से जुड़ रहे हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव कर रहे हैं।


गीता प्रचार यात्रा का उद्देश्य

श्री कैलाश मंथन ने वर्षों पूर्व यह संकल्प लिया था कि वे गीता के सार्वभौमिक संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाएंगे। इसी उद्देश्य से उन्होंने ‘गीता प्रचार यात्रा’ की शुरुआत की।

अब तक वे देश के विभिन्न राज्यों — उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और बंगाल में सैकड़ों गीता वितरण कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं।

“गीता कोई धर्म विशेष का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला शाश्वत मार्गदर्शन है,” श्री मंथन अक्सर अपने प्रवचनों में कहते हैं।


जन-जन तक आध्यात्मिक संदेश

उनकी प्रेरणा से कई युवा और सामाजिक संस्थाएँ इस अभियान से जुड़ चुकी हैं। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में गीता पर आधारित कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं।

जिसके अंतर्गत लोगों को निःशुल्क गीता पुस्तकें वितरित की गईं।

“श्री मंथन जी के प्रवचन सुनकर जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदल गया। अब हर परिस्थिति में शांत और सकारात्मक सोचना सीख गया हूँ।”


डिजिटल माध्यम से नया प्रयोग

समय की आवश्यकता को समझते हुए श्री कैलाश मंथन ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी उपयोग शुरू किया है।

उनके डिजिटल कार्यक्रम को यूट्यूब और फेसबुक पर लाखों लोग देख रहे हैं। इसके माध्यम से वे युवाओं को आधुनिक जीवन की चुनौतियों का समाधान गीता के सिद्धांतों को समझाते हैं।


भविष्य की योजना

श्री मंथन अब “गीता ग्राम” की स्थापना का संकल्प ले चुके हैं — जहाँ लोग गीता अध्ययन, ध्यान और चरित्र निर्माण के लिए समय बिता सकेंगे। उनका कहना है कि “आध्यात्मिक शिक्षा केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि जीवन के आचरण में दिखनी चाहिए।”

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